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तो कर न सकेगा… कर न सकेगा
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: प्रेरणादायक,सामाजिक,प्रेम
तू चाहेगा करना दुराचार,
मगर जब राम की आत्मा जगेगी अंदर,
तो कर न सकेगा… कर न सकेगा।
तू चाहेगा छल से किसी को हराना,
मगर जब कृष्ण की मुरली बजेगी अं...
कवि: डॉ पी के झा
दिनांक: 31 Aug, 2025
स्त्री मन
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: सामाजिक
क्यूँ हृदय की पीड़ा
अकुलाती है बाहर आने को
क्यूँ नहीं मन रमता है
अपने ही अंदर!
आख़िर वर्षों से तो स्त्रियों ने
संदूक की निचली तह में रखी
उस...
कवि: विनीता पुष्पम
दिनांक: 27 Aug, 2025
तेरा वज़ूद
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: प्रेम
कैसे बताऊँ कि तुम मेरे लिए क्या हो...
कैसे बताऊँ कि तुम मेरे लिए क्या हो...
तुम स्पर्श, तुम श्वास, तुम ही प्रकाश,
तुम ही धूप-छाँव, तुम बूँद, तुमसे ...
कवि: निभा झा
दिनांक: 25 Aug, 2025
शिव -शक्ति
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: प्रेम
तुम हो शिव —
अचल, निस्तब्ध गहराई।
मैं हूँ शक्ति —
जीवन की तरंगाई।
तुम ध्यान —
मौन समाधि का विचार।
मैं चपल, चंचल —
फूलों की गंध, पवन का ...
कवि: निभा झा
दिनांक: 25 Aug, 2025
स्त्री
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: सामाजिक
मैं तुम्हारी बंदिनी नहीं
बल्कि वह हूँ,
जो झुकती है,
ताकि तुम्हारे दर्प का प्रासाद
गगन को छू सके_
मेरे दृग के कारागृह से
बहते आसूँओं की बूँदे...
कवि: अनिता सिंह
दिनांक: 22 Aug, 2025
एक अभिशप्त रेल यात्रा
श्रेणी: ब्लॉग और लेख
उपश्रेणी: संस्मरण
वर्ष 1984, जुलाई का महीना, किताबों से भरा बक्सा माथा पर रखकर खेतों की पतली पगडंडियों पर संतुलन बनाकर चलते हुए अपने गांव से कोई डेढ़ कोस दूर काशीचक रेल...
कवि: अरविन्द पाण्डेय 'मैत्रीबोध'
दिनांक: 21 Aug, 2025
जो पल है, यह है, यही है!
श्रेणी:
उपश्रेणी:
दुख में सुख की आस जगी
सुख में कल की चिंता सजी
कल के पछतावे में खोना नहीं
जो पल है, यह है, यही है।
जो मिला है वो क्या कम है
जो न मिला उसका क्यों गम है...
कवि: डॉ पी के झा
दिनांक: 19 Aug, 2025
हम हैं साहित्यवाले
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: सामाजिक
शब्दों के चित्रकार हैं हम,
प्रगति के पैरोकार हैं हम,
शब्दों से रंग भरने वाले,
हम हैं साहित्यवाले।
विचारों में अनेकता है,
दिल में बसती एकता है,
हम नह...
कवि: सुषमा कुमारी
दिनांक: 08 Aug, 2025
युवा मन के अंकुर...
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: सामाजिक
है अंधेरा गज़ब.. राह दिखती नहीं
डर के ये दो कदम रुक न जाएं कहीं..
जिंदगी है सफ़र.. जानता मैं भी हूं
चलके मंज़िल मिलेगी.. भरोसा नहीं
लाख अरमान कुचले ग...
कवि: देवाशीष
दिनांक: 06 Aug, 2025
रुकने का अब समय नहीं है ...
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: प्रेरणादायक
आओ हर क्रंदन से कह दें ..
रोने का अब समय नहीं है ।
आओ हर अड़चन से कह दें ..
तुझसे डरने की वज़ह नहीं है ।
जग के अभिनंदन से कह दें..
अवलोकन का समय नही...
कवि: देवाशीष
दिनांक: 06 Aug, 2025
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