श्वेता दीप्ति

श्वेता दीप्ति

ज़र्रा ही सही एक वज़ूद अपना भी है।

पूर्ण जीवनी

मैं बिहार कोशी क्षेत्र मधेपुरा जिला किशुनगंज से हूँ। वर्तमान में काठमांडू नेपाल मेरा ठिकाना है।
अपनी मिट्टी से दूर कहीं बस जाना, और फिर वहीँ का हो जाना मुश्किल होता है। 28 वर्षों से नेपाली नागरिक हूँ। लिखना बचपन से अच्छा लगता था जिसे अपनी मिट्टी से छूटने का दर्द, बेगानेपन का दर्द, विभेद से उपजी दर्द की अनुभूति ने उर्वर बनाया। सत्रह वर्षों से काठमान्डू में हिन्दी केन्द्रीय विभाग त्रिभुवन विश्वविद्यालय में कार्यरत हूं और वर्तमान में विभागीय प्रमुख के पद पर हूँ। नेपाल में हिन्दी भाषा अपरिचित भाषा नहीं है बावजूद इसके हिन्दी को लेकर प्रतिकूल वातावरण है। इस परिवेश में हिन्दी के लिए एक अपनी लड़ाई है मेरी जो जारी है।
साहित्य में बचपन से अभिरुचि रही है। पहली बार 1992 में (राजस्थान)से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘मधुमती’ में आपकी रचना प्रकाशित हुई। तत्पश्चात् लिखने और छपने का सिलसिला अनवरत जारी है।
नेपाल से प्रकाशित होने वाली हिन्दी मासिक पत्रिका ‘हिमालिनी’ की संपादक हूँ। अब तक दस पुस्तकें — ‘अनुभूतियों के बिखरे पल’(कविता संग्रह), ‘विविधा’, ‘नारी जीवन विगत से वर्तमान’, ‘उषाप्रियम्बदा की नारी पात्र की मानसिक त्रासदी’(शोध पुस्तक), ‘मोदियाइन’(भोजपुरी भाषा में अनूदित), ‘आधुनिक कविता की परम्परा-एक अनुशीलन’, ‘भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र’, ‘शेष होते शब्द’(कविता संग्रह)‘साहित्य शोध समिधा’, ‘टुकड़ों में बटी जिन्दगी’, प्रकाशित हो चुकी हैं। कई प्रकाशाधीन हैं। कई नेपाली पुस्तकों का हिन्दी भाषा में अनुवाद भी किया है ।
नेपाल सरकार द्वारा नेपाल विद्याभूषण सम्मान, हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा समीक्षा सम्मान, क्रांतिधरा मेरठ साहित्य रत्न सम्मान, अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि सम्मान, मातादीन मूर्तिदेवी स्मृति पुरस्कार, साहित्य–सृजन सेवा पदक नई दिल्ली, हिन्दी–साहित्य सेवा हेतु पार्वती स्मृति पुरस्कार आदि मिला है। नेपाल भारत मैत्री समाज, नेपाल हिन्दी प्रतिष्ठान, नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान, उर्दू प्रतिष्ठान नेपाल आदि प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्मानित हुई हूँ।
साहित्य के विभिन्न विधाओं में स्वतंत्र लेखन करती हूं। देश-विदेश की कई प्रसिद्ध पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन होता रहा है। कई पुस्तकों का संपादन किया है। अन्य सक्रियता कुछ इस प्रकार है–
अक्षरंग साहित्यिक वेव पत्रिका काठमान्डौ की सह संपादक, जर्नल आफ ह्यूमेनिटीज एण्ड सोशल साइंस अलीगढ़, उत्तर प्रदेश भारत की नेपाल प्रतिनिधि एवं सह संपादक, उर्वशी अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका भोपाल, मध्य प्रदेश की नेपाल प्रतिनिधि, एवं सह संपादक, जरा फाउन्डेशन, साहित्य एवं संस्कृति, काठमाडौं, नेपाल की सदस्य, साहित्य कला मंदिर काठमाडौँ, नेपाल की सदस्य, डा। कृष्णचन्द्र मिश्र अकादमी, काठमान्डौ, नेपाल की आजीवन सदस्य हैं ।
हिन्दी के प्रति लगाव और अथक परिश्रम ने
एक पहचान अवश्य दी है। हिन्दी भाषा की समृद्धि और संवर्धन हेतु सतत् प्रयत्नशील हूँ।