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हम हैं साहित्यवाले

कवि: सुषमा कुमारी


शब्दों के चित्रकार हैं हम, प्रगति के पैरोकार हैं हम, शब्दों से रंग भरने वाले, हम हैं साहित्यवाले। विचारों में अनेकता है, दिल में बसती एकता है, हम नहीं टूटने वाले, हम हैं साहित्यवाले। विषयों की विविधता है, शब्दों की गहनता है, हम हैं कलम वाले, हम हैं साहित्यवाले। विचारों से उठाते तूफान भी है, शब्दों से चलाते बाण भी हैं, हम नहीं डरने वाले, हम हैं साहित्यवाले।
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रचना के बारे में

संदर्भ: कविता बताती है हम साहित्यवालों की खासियत। श्रेणी: कविता संग्रह उपश्रेणी: सामाजिक

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