जो पल है, यह है, यही है!
कवि: डॉ पी के झा
दुख में सुख की आस जगी
सुख में कल की चिंता सजी
कल के पछतावे में खोना नहीं
जो पल है, यह है, यही है।
जो मिला है वो क्या कम है
जो न मिला उसका क्यों गम है
इस गम में जो मिला वो न गुम हो
जो पल है, यह है, यही है।
राम हृदय में.. कृष्ण हैं मन में
सारे युग हैं.. इस एक क्षण में
इस पल को हरगिज़ खोना नहीं
जो पल है, यह है, यही है।
बालक जैसे खेल में डूबा
जो है बस उसी में समाया
आनंद यही मिष्ठान्न यही है
जो पल है, यह है, यही है।
भूत से सीखो भविष्य सजाओ
पर वर्तमान को जी भर जियो
जीवन का अंतिम सत्य यही है
जो पल है, यह है, यही है।
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