देवाशीष

देवाशीष

जीवनयात्रा में कविताएं मेरी मित्र रही हैं..संबल भी

पूर्ण जीवनी

पिता प्रोफेसर थे.. पर मुझसे पढ़ने में मेहनत कभी न हो पाई । हां, जीवन के संघर्षों से जी कभी नहीं चुराया। समय रहते.. जैसे तैसे MBA कर लिया और जीविकोपार्जन में लग गए ..

काम काज की मगजमारी.. और कविताओं की कलाकारी साथ साथ चलती रही .. और ये सिलसिला अनवरत जारी है ..