कविता - साहित्यवाले.कॉम

कविता

कवि: अनीता सिंह


क्षणिक भावमय चिंतन से लेती है जन्म इक कविता वर्षों कवि के अंतर्मन में हरपल पनपती है इक कविता... नयनों में बनके अश्रु-कण कभी चमकती है इक कविता अधरों की मुस्कान बनी कभी विहंसती है इक कविता... सूने बिस्तर की सिलवट में कभी सिसकती है इक कविता दो बाहों के आलिंगन में कभी सिमटती है इक कविता... पूजा के श्रद्धा पुष्पों सी कभी महकती है इक कविता क्रोधाग्नि की ज्वाला बन कर कभी धधकती है इक कविता... वात्सल्य भरी, ममतामयी सी कभी छलकती है इक कविता आवेश..ईर्ष्या..द्वेष भरी कभी उफ़नती है इक कविता... मेरे भावों से निखर सँवर और शब्द-सुरभि में रची बसी क्या पहुँच रही है तुम तक भी संदेश वाहक सी कोई कविता ??
33 बार देखा गया

साझा करें:

रचना के बारे में

श्रेणी: कविता संग्रह उपश्रेणी: प्रेम

कीवर्ड्स (Keywords)

कविताचिंतनसंदेशशब्द.

टिप्पणियाँ (Comments)


0 टिप्पणियाँ

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है।