आज की पत्रकारिता
कवि: हरेन्द्र प्रताप सिंह
मैं कलमकार हूं
पत्रकारिता कर रहा हूं
बेईमानी के काले तवे पर
ईमानदारी की सफेद रोटियां
सेंक रहा हूं
ख़ून सने हाथों से
खबरों को गूंथ रहा हूं
लोकतंत्र के तंग करते जालों को
तोड़ रहा हूं
समानांतर सरकारों को
जाने - अनजाने
उससे जोड़ रहा हूं
रोटियां बेल रहा हूं
सपने देख रहा हूं
संपादक बन चुका हूं
आदमी बन रहा हूं !
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