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पछतावा

कवि: डॉ पी के झा


मेडिकल साइंस मरने नहीं देती, समाज जीने नहीं देता। ना जीवन का सुख शेष रहा, ना मृत्यु का द्वार ही खुलता। न साँसों में उत्साह बचा, न आँखों में अब कोई सपना। बस शरीर जर्जर चलता है, मन हर पल चाहे विराम अपना। जो कभी थे शक्ति के मंदिर, आज बेबस से नज़र आते हैं। जिनके इशारों पर चलती थी भीड़, अब पानी को भी तरस जाते हैं। जीवन का यह द्वंद देख लो, सत्ता, सम्मान, सब व्यर्थ लगे। जहाँ चाह थी मुक्ति की आज, वहीं मृत्यु भी बंधन बन जगे। हे नवयुवक! यह सीख लो, अहंकार का अंत यही होता। जो समय रहते सुधर जाए, वही सच्चे पथ पर चलता। वरना विज्ञान रखेगा ज़िंदा, और समाज जीने न देगा। फिर तुम भी यही कहोगे — मृत्यु ही अब जीवन से बेहतर है।
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रचना के बारे में

संदर्भ: यह कविता उस कड़वी सच्चाई को दर्शाती है जहाँ मेडिकल साइंस व्यक्ति के जीवन को तो बचा लेती है, पर समाज उसे सम्मान और सुख के साथ जीने नहीं देता। कविता में शारीरिक और मानसिक गिरावट, शक्ति और सम्मान के खो जाने का दर्द है। इसका मुख्य विषय जीवन और मृत्यु के बीच का संघर्ष है, जहाँ मृत्यु को भी एक बंधन के रूप में देखा जाता है। कविता का अंत नवयुवकों को अहंकार से दूर रहने की सलाह देता है, और यह सिखाता है कि समय रहते सुधार करना ही सच्चे जीवन का मार्ग है, अन्यथा व्यक्ति को जीवन से ज़्यादा मृत्यु बेहतर लगने लगती है। श्रेणी: कविता संग्रह उपश्रेणी: प्रेरणादायकउपश्रेणी: सामाजिक

कीवर्ड्स (Keywords)

जीवन मृत्यु संघर्षसमाज और विज्ञानअहंकार का पतनजीवन की पीड़ाजीने का संघर्ष युवाओं के लिए संदेश

प्रश्न और उत्तर

Q1. कवि, मेडिकल साइंस और समाज की भूमिका को किस प्रकार चित्रित करता है?

A1. कवि के अनुसार, मेडिकल साइंस व्यक्ति को मरने नहीं देती, जबकि समाज उसे सुख और सम्मान के साथ जीने नहीं देता। मेडिकल साइंस शरीर को तो ज़िंदा रखती है, पर समाज की उपेक्षा से व्यक्ति का मन हर पल विराम चाहता है।

Q2. कविता में "जीवन का यह द्वंद" क्या है और यह क्यों उत्पन्न होता है?

A2. कविता में "जीवन का द्वंद" मेडिकल साइंस द्वारा दिए गए जीवन और समाज द्वारा छीने गए सुख के बीच का संघर्ष है। यह द्वंद तब उत्पन्न होता है जब व्यक्ति की सत्ता, सम्मान और शक्ति समाप्त हो जाती है।

Q3. कवि नवयुवकों को अहंकार का अंत किस रूप में दिखाकर चेतावनी दे रहा है?

A3. कवि नवयुवकों को चेतावनी देते हुए कहता है कि जो लोग कभी शक्ति के मंदिर थे और जिनके इशारों पर भीड़ चलती थी, वे अंत में बेबस और पानी को भी तरसते हैं। यह अहंकार का ही परिणाम है और यही इसका अंतिम रूप है।

Q4. कविता में "मृत्यु ही अब जीवन से बेहतर है" कहने के पीछे क्या भावनाएँ छिपी हैं?

A4. इस कथन के पीछे गहरी निराशा, पीड़ा और अस्तित्वहीनता की भावनाएँ छिपी हैं। जब व्यक्ति जीवन का कोई सुख अनुभव नहीं करता और शारीरिक रूप से जर्जर होने के बावजूद ज़िंदा रहता है, तो उसे मृत्यु ही इस पीड़ा से मुक्ति का एकमात्र द्वार लगने लगती है।

Q5. आपकी राय में, कविता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है और क्यों?

A5. कविता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि अहंकार का त्याग और समय रहते सही रास्ते पर चलना आवश्यक है। क्योंकि अंत में मेडिकल साइंस भले ही जीवन को खींचती रहे, लेकिन एक सम्मानजनक और सुखद जीवन के लिए यह ज़रूरी है कि व्यक्ति अपने व्यवहार और सोच में सुधार लाए।

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