... दोस्त वही तो कहलाए - साहित्यवाले.कॉम

... दोस्त वही तो कहलाए

कवि: देवाशीष


उलझन मन की जो सुलझा दे, दोस्त वही तो कहलाए.. हार की पीड़ा जो बिसरा दे, दोस्त वही तो कहलाए | संघर्षों की हो दोपहरी या तपन थकन की गोधूलि .. मन मयूर को जो थिरका दे, दोस्त वो बादल कहलाए | मन की अकुलाहट को हर ले, हाथ तुम्हारा यूं भींचे.. बिन बोले ही सब जतला दे, दोस्त वही तो कहलाए | छुटपन के खेल तमाशे हों या ढलती उमर का पार्क भ्रमण... तुम्हें देख जो दूर से चहके, दोस्त वही तो कहलाए | Happy Friendship Day !
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रचना के बारे में

संदर्भ: A sweet poem written on friendship day & dedicated to friends of the world ... श्रेणी: कविता संग्रह उपश्रेणी: प्रेम

कीवर्ड्स (Keywords)

उलझनमनदोस्तfriendfriendshipheartsilentlybachpanchildhoodpainपीड़ाहार

प्रश्न और उत्तर

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Q1 : yeh kavita kya darshati hai ?
A1 : Yeh kavita jeevan mein mitron ki mahatta aur unki khasiyat ko softly darshati hai ...

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