... दोस्त वही तो कहलाए
कवि: देवाशीष
उलझन मन की जो सुलझा दे, दोस्त वही तो कहलाए..
हार की पीड़ा जो बिसरा दे, दोस्त वही तो कहलाए |
संघर्षों की हो दोपहरी या तपन थकन की गोधूलि ..
मन मयूर को जो थिरका दे, दोस्त वो बादल कहलाए |
मन की अकुलाहट को हर ले, हाथ तुम्हारा यूं भींचे..
बिन बोले ही सब जतला दे, दोस्त वही तो कहलाए |
छुटपन के खेल तमाशे हों या ढलती उमर का पार्क भ्रमण...
तुम्हें देख जो दूर से चहके, दोस्त वही तो कहलाए |
Happy Friendship Day !
रचना के बारे में
संदर्भ: A sweet poem written on friendship day & dedicated to friends of the world ...
श्रेणी: कविता संग्रह
उपश्रेणी: प्रेम
कीवर्ड्स (Keywords)
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प्रश्न और उत्तर
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Q1 : yeh kavita kya darshati hai ? A1 : Yeh kavita jeevan mein mitron ki mahatta aur unki khasiyat ko softly darshati hai ...
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