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अंधभक्तों की मनमानी

कवि: प्रीतम मिश्रा


ये कैसी दौड़ अंधभक्तों की भगवान के नाम पर गुंडागर्दी क्या कभी था देखा ऐसा बयार हर तरफ है गुंडों का अत्याचार क्या होड़ है तुम सब में ऐसा क्यों जान गंवाए जाते हो भगवान के नाम पर ना जाने बिसात बिछाए जाते हो कब तक भटकोगे ऐसे तुम कब सुकून तुम पाओगे क्या ईश्वर के नाम पर ही तुम लाशें बिछवाते जाओगे।
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श्रेणी: कविता संग्रह उपश्रेणी: प्रेरणादायकउपश्रेणी: सामाजिक

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