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विद्यालय की सूरत

कवि: प्रीतम मिश्रा


जागो जागो दुनियावालों देखो सूरत विद्यालय की कहीं शिक्षक हैं बच्चे नहीं कहीं बच्चे हैं तो भवन नहीं शिक्षा को व्यापार बनानेवालों सोचा क्या इन बच्चों का भविष्य क्यों बेच दिया अपना ज़मीर खुद के सुख की होड़ में शर्म करो थोड़ी गर तुम इन बच्चों का मुकद्दर बन जाए शिक्षा का मशाल जला दो तुम बच्चों की झोली भर जाए मेरा ये देश संवर जाए मेरा ये देश संवर जाए।
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रचना के बारे में

श्रेणी: कविता संग्रह उपश्रेणी: सामाजिक

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